ये न थी हमारी - Ye Na Thi Hamaari (Suraiya, Chitra Singh, Mirza Ghalib)

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Movie/Album: मिर्ज़ा ग़ालिब (1954), मिर्ज़ा ग़ालिब (टी वी सीरियल) (1988)
Music By: ग़ुलाम मोहम्मद, जगजीत सिंह
Lyrics By: मिर्ज़ा ग़ालिब
Performed By: सुरैया, चित्रा सिंह

सुरैया
ये न थी हमारी क़िस्मत, के विसाल-ए-यार होता
अगर और जीते रहते, यही इन्तज़ार होता
ये न थी हमारी क़िस्मत...

तेरे वादे पर जिये हम, तो ये जान झूठ जाना
कि ख़ुशी से मर न जाते, अगर ऐतबार होता
ये न थी हमारी...

हुए मर के हम जो रुस्वा, हुए क्यूँ न ग़र्क़-ए-दरिया
न कभी जनाज़ा उठता, न कहीं मज़ार होता
ये न थी हमारी...

कोई मेरे दिल से पूछे, तेरे तीर-ए-नीमकश को
ये ख़लिश कहाँ से होती, जो जिगर के पार होता

चित्रा सिंह
ये न थी हमारी क़िस्मत, के विसाल-ए-यार होता
अगर और जीते रहते, यही इन्तज़ार होता
ये न थी हमारी क़िस्मत

कहूँ किससे मैं कि क्या है, शब-ए-ग़म बुरी बला है
मुझे क्या बुरा था मरना, अगर एक बार होता
ये न थी हमारी...

कोई मेरे दिल से पूछे, तेरे तीर-ए-नीमकश को
ये ख़लिश कहाँ से होती, जो जिगर के पार होता
ये न थी हमारी...

ये कहाँ की दोस्ती है कि बने हैं दोस्त नासेह
कोई चारासाज़ होता, कोई ग़मगुसार होता
ये न थी हमारी...

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